Tuesday, 28 July 2026
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ईसाई स्कूल में ‘हिजाब’ पर रोक, SDPI पर हमला करने का आरोप — केरल में मचा हंगामा

छात्रा बोली — “टीचर ने गेट पर रोक लिया, कहा हिजाब हटाओ, नहीं तो अंदर मत आओ।”

केरल के एर्नाकुलम ज़िले के पलुरुथी इलाके में स्थित एक चर्च-प्रबंधित स्कूल सेंट रीटा पब्लिक स्कूल इन दिनों हिजाब विवाद को लेकर राजनीतिक तूफान के केंद्र में है। आठवीं कक्षा की एक छात्रा को हिजाब पहनकर स्कूल में प्रवेश से रोकने के बाद मामला इतना गरमाया कि अब यह विवाद राजनीतिक, धार्मिक और कानूनी मोड़ ले चुका है।

घटना की शुरुआत पिछले सप्ताह हुई, जब छात्रा ने हिजाब पहनकर कक्षा में जाने की कोशिश की। स्कूल प्रशासन ने कथित तौर पर उसे गेट पर रोक लिया और कहा कि हिजाब स्कूल के “ड्रेस कोड” का उल्लंघन है। छात्रा का आरोप है कि शिक्षकों ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।

छात्रा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह स्कूल मुझे हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दे रहा है। उन्होंने मुझे कक्षा के दरवाजे पर रोक लिया और कहा कि इसे उतारो। शिक्षक बहुत रूखे थे। मैंने फैसला किया है कि अब मैं यहाँ नहीं पढ़ूँगी।”

इस घटना के बाद छात्रा के माता-पिता और स्कूल प्रशासन के बीच जोरदार बहस हुई। मामला जल्द ही पैरेंट-टीचर एसोसिएशन (PTA) तक पहुँच गया। PTA अध्यक्ष जोशी कैथवलप्पिल ने NDTV से बातचीत में कहा कि “यह केवल एक छात्रा का मामला नहीं है, बल्कि यह एक योजनाबद्ध प्रयास है, जो एक ईसाई-प्रबंधित शैक्षणिक संस्थान पर सुनियोजित हमला करने जैसा है।”

उन्होंने दावा किया कि छात्रा के माता-पिता को सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का समर्थन प्राप्त है — यह वही संगठन है जिसे अब प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़ा माना जाता है। PTA प्रमुख ने कहा, “SDPI कार्यकर्ता इस विवाद के पीछे हैं। उन्होंने स्कूल पर दबाव बनाने की कोशिश की और माता-पिता से ज़्यादा आक्रामक रुख अपनाया।”

जब स्थिति बिगड़ने लगी तो स्कूल प्रशासन ने सुरक्षा के लिए केरल हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और पुलिस सुरक्षा की मांग की। साथ ही, संस्थान ने दो दिन की छुट्टी — 13 और 14 अक्टूबर — की घोषणा कर दी, ताकि तनाव कम हो सके।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद की जड़ 7 अक्टूबर को पड़ी, जब छात्रा को पहली बार हिजाब पहनने पर रोका गया। तीन दिन बाद फिर वही घटना दोहराई गई, इस बार छात्रा के पिता और कुछ लोग — जो कथित तौर पर SDPI से जुड़े थे — स्कूल पहुंचे और स्टाफ पर अभद्र टिप्पणियाँ करते हुए हंगामा मचा दिया।

पिता का कहना है कि उनकी बेटी पिछले चार महीनों से हिजाब पहन रही थी, लेकिन वह पारंपरिक रूप से पिन से नहीं लगाती थी, बल्कि सिर पर दुपट्टे की तरह डालती थी। “अब तक स्कूल ने कोई आपत्ति नहीं जताई, लेकिन अचानक नियम बदल गए,” उन्होंने कहा।

हालांकि, स्कूल प्रिंसिपल सिस्टर हेलेना का कहना है कि सभी अभिभावकों को प्रवेश के समय ड्रेस कोड की जानकारी दी गई थी। “यह छात्रा पिछले चार महीनों तक ड्रेस कोड का पालन करती रही। लेकिन एक दिन अचानक उसने नियमों का उल्लंघन किया,” उन्होंने कहा।

स्कूल प्रशासन ने अन्य अभिभावकों को पत्र लिखकर कहा कि समानता बनाए रखने के लिए सभी छात्रों को एक समान पोशाक पहनना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्कूल में पहले से 117 मुस्लिम छात्राएँ पढ़ती हैं, और सभी यूनिफॉर्म नीति का पालन करती हैं।

वहीं, इस मामले में राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज़ हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने SDPI पर “स्कूल में रुकावट डालने” और “राज्य की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुंचाने” का आरोप लगाया। भाजपा नेता शोने जॉर्ज ने कहा, “एक बच्ची का हिजाब पहनना गलत नहीं है, लेकिन जिस तरह SDPI ने स्कूल में घुसकर हंगामा किया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। यह व्यवहार किसी लोकतांत्रिक राज्य का नहीं, बल्कि इस्लामिक स्टेट जैसी सोच का प्रतीक है।”

उन्होंने आगे कहा कि “117 मुस्लिम छात्राएँ उसी स्कूल में पढ़ती हैं और सभी नियमों का पालन करती हैं। फिर एक छात्रा के लिए पूरा स्कूल बंद हो गया, यह चिंताजनक है।” यह विवाद अब धर्म, शिक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच टकराव का नया उदाहरण बन गया है। केरल जैसे प्रगतिशील राज्य में यह घटना “धार्मिक पहचान बनाम संस्थागत अनुशासन” की बहस को और गहरा कर रही है।

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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